सर्दी का मौसम जहां स्वस्थ लोगों के लिए सौगात बनकर आता है तो वहीं अस्थमा के रोगियों के लिए परेशानी का सबब भी रहता है। अस्थमा रोगियों के लिए खासकर चढ़ती और उतरती सर्दी ज्यादा घातक होती है, क्योंकि इस दौरान मौसम में तेजी से बदलाव होता है। इससे उनमें सांस चलने की समस्या काफी बढ़ जाती है। अब जबकि मकर संक्रांति के बाद सूरज अपनी दिशा बदलेगा तो बदलते मौसम में अस्थमा रोगियों को कुछ ज्यादा सतर्कता रखनी होगी। घर के बाहर निकलने पर इन्हें अपने मुंह और नाक को मास्क या कपड़े से कवर करके रखना होगा। इसके अलावा डाइट में कुछ चीजों को शामिल करने से भी अस्थमा के मरीजों को थोड़ी सहूलियत हो सकती है। एसे मे हम अापको बताने जा रहे हे तीन असरदार तरीके…
तीन तरीके आजमा कर पाएं राहत
हल्दी और शहद
हल्दी और शहद दोनों में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी एलर्जिक प्रॉपर्टीज होती हैं जो कफ से राहत दिलाती है। अगर हल्दी व शहद को मिलाकर लिया जाए तो इसका असर दोगुना हो जाता है। अस्थमा के रोगियों के लिए तो यह प्रभावी फॉर्मूला है। रोजाना दो बार चुटकी भर हल्दी में शहद मिलाकर उसे चाटने से अस्थमा रोगियों को श्वास चलने की समस्या में राहत मिलती है। सर्दी-जुकाम से परेशान सामान्य व्यक्ति भी इसका इस्तेमाल कर सकता है।
अंजीर का सेवन
रोजाना रात को सोने से पहले साफ पानी में दो-तीन सूखे अंजीर भिगो दीजिए। अंजीर भिगोने से पहले उन्हें भी अच्छे से धो लीजिए। सुबह उठकर खाली पेट ही उन्हें अच्छी तरह से चबा-चबाकर खा लीजिए। अंजीर खाने के बाद उस पानी को पी लीजिए जिसमें आपने रात भर अंजीर भिगोए थे। अंजीर श्वास नली में जमा कफ को साफ कर देता है जिससे अस्थमा के मरीज को श्वास लेने में कम दिक्कत होती है।
अदरक-लहसुन की चाय
अस्थमा के दौरान श्वास लेने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने में अदरक और लहसुन की चाय भी काफी मददगार होती है। इसे बनाना भी बहुत आसान है। पहले अदरक की सामान्य चाय बना लीजिए। अब लहसुन की दो-दिन कलियों को पीसकर उसे उस चाय में मिक्स कर लीजिए। अब इसे दोबारा से गरम करने की जरूरत नहीं है। यह चाय पीने में बेस्वाद लग सकती है, लेकिन काफी असरदार होती है।




