How to Do Surya Namaskar Complete Guide In Hindi

      सूर्य नमस्कार के द्वारा त्वचा रोग समाप्त हो जाते हैं अथवा इनके होने की संभावना समाप्त हो जाती है। इस अभ्यास से कब्ज आदि उदर रोग समाप्त हो जाते हैं और पाचन तंत्र की क्रियाशीलता में वृद्धि हो जाती है। 
इस अभ्यास के द्वारा हमारे शरीर की छोटी-बड़ी सभी नस-नाडि़यां क्रियाशील हो जाती हैं, इसलिए आलस्य, अतिनिद्रा आदि विकार दूर हो जाते हैं। सूर्य नमस्कार की तीसरी व पांचवीं स्थितियां सर्वाइकल एवं स्लिप डिस्क वाले रोगियों के लिए वर्जित हैं।
सूर्य नमस्कार के १२ आसन | 12 Steps of Surya Namaskar in Hindi:
प्रणाम आसन | Prayer pose
हस्तउत्तानासन |Raised Arms pose
हस्तपाद आसन |Hand to Foot pose
अश्व संचालन आसन | Equestrian pose
दंडासन |Dandasana (Stick pose)
अष्टांग नमस्कार | Ashtanga Namaskara (Salute With Eight Parts Or Points)
भुजंग आसन |Bhujangasana (Cobra pose)
पर्वत आसन | Parvatasana (Mountain pose)
अश्वसंचालन आसन | Ashwa Sanchalanasana (Equestrian pose)
हस्तपाद आसन | Hasta Padasana (Hand to Foot pose)
हस्तउत्थान आसन | Hastauttanasana (Raised Arms pose)
ताड़ासन | Tadasana

1
प्रणाम आसन

अपने आसन (मैट) के किनारे पर खड़े हो जाएँ, अपने दोनों पंजे एक साथ जोड़ कर रखें और पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें। नेत्र बंद करें।अपनी छाती फुलाएँ और कंधे ढीले रखें।
श्वास लेते हुए दोनों हाथ बगल से ऊपर उठाएँ और श्वास छोड़ते हुए हथेलियों को जोड़ते हुए छाती के सामने प्रणाम मुद्रा में ले आएँ।
 ध्यान ‘आज्ञा चक्र’ पर केंद्रित  करें।

2
हस्तउत्तानासन

श्वास लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएँ और पीछे ले जाएँ व बाजुओं की द्विशिर  (बाइसेप्स) पेशियों को कानों के समीप रखें। इस आसन में पूरे शरीर को एड़ियों से लेकर हाथों की उंगलियों तक सभी अंगों को ऊपर की तरफ खींचने का प्रयास करें।
इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?
अपने कूल्हे को आगे की तरफ धकेल कर यह सुनिश्चित करें कि आप अपनी उंगलियों के साथ ऊपर की ओर जा रहे हैं ना कि पीछे की तरफ मुड़ रहे हैं।
ध्यान को गर्दन के पीछे ‘विशुद्धि चक्र’ पर केन्द्रित करें।

3
हस्तपाद आसन

श्वास छोड़ते हुए व रीढ़ की हड्डी सीधी रखते हुए कमर से आगे झुकें। पूरी तरह श्वास छोड़ते हुए दोनों हाथों को पंजो के समीप ज़मीन पर रखें।
माथा घुटनों का स्पर्श करता हुआ ध्यान नाभि के पीछे ‘मणिपूरक चक्र’ पर केन्द्रित करते हुए कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें। 
कमर एवं रीढ़ के दोष वाले साधक न करें।
इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?
हथेलियों को ज़मीन तक लाने में अगर ज़रूरत हो तो घुटने मोड़ सकते हैं, और अब घुटनों को सीधा करने का एक सौम्य प्रयास करें। जब तक सूर्य नमस्कार का यह क्रम पूरा ना हो जाए तब तक अपने हाथों की इस स्थिति को इसी स्थान पर स्थिर रखें।

4
अश्व संचालन आसन

इसी स्थिति में श्वांस को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। छाती को खींचकर आगे की ओर तानें। गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस स्थिति में कुछ समय रुकें। ध्यान को ‘स्वाधिष्ठान’ अथवा ‘विशुद्घि चक्र’ पर ले जाएं। मुखाकृति सामान्य रखें।

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ? सुनिश्चित करें कि बायां पैर दोनों हथेलिओं के बीच में रहे

5
दंडासन

श्वास लेते हुए बाएँ पैर को पीछे ले जाएँ और संपूर्ण शरीर को सीधी रेखा में रखें।
ध्यान ‘सहस्रार चक्र’ पर केन्द्रित करने का अभ्यास करें।

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ? अपने हाथ ज़मीन के लंबवत रखें।

6
अष्टांग नमस्कार

आराम से दोनों घुटने ज़मीन पर लाएँ और श्वास छोडें। अपने कूल्हों को पीछे उपर की ओर उठाएँ I पूरे शरीर को आगे की ओर खिसकाएँI अपनी छाती और ठुड्डी को ज़मीन से छुएँ।
श्वांस छोड़ दें। ध्यान को ‘अनाहत चक्र’ पर टिका दें। श्वास की गति सामान्य करें।

अपने कुल्हों को थोड़ा उठा कर ही रखेंI अब दो हाथ, दो पैर, दो घुटने, छाती और ठुड्डी (शरीर के आठ अंग) ज़मीन को छूते हुए होंगे।

7
भुजंग आसन

आगे की ओर सरकते हुए, भुजंगासन में छाती को उठाएँI कुहनियाँ  (Elbow) मुड़ी रह सकती हैं। कंधे कानों से दूर और दृष्टि ऊपर की ओर रखें।
मूलाधार को खींचकर वहीं ध्यान को टिका दें।

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?

श्वास लेते हुए छाती को आगे की तरफ धकेलने का सौम्य प्रयास करें। श्वास छोड़ते हुए नाभि को सहजता से नीचे की ओर दबाएँI पैरों की उंगलियों को भी नीचे की तरफ दबाएँ। यह सुनिश्चित करें कि जितना कर सकते हैं उतना ही करें, अपने साथ ज़बरदस्ती ना करें।

8
पर्वत आसन

श्वास छोड़ते हुए कूल्हों और रीढ़ की हड्डी के निचले भाग को ऊपर उठाएँ, छाती को नीचे झुकाकर एक उल्टे वी (˄) के आकार में आ जाएँ।

ध्यान ‘सहस्रार चक्र’ पर केन्द्रित करने का अभ्यास करें।

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ? यदि संभव हो तो एड़ियों को ज़मीन पर ही रखें और रीढ़ के निचले भाग को ऊपर उठाने का प्रयास करें। खिंचाव को गहराई से अनुभव करें।

9
अश्वसंचालन आसन

श्वास लेते हुए दाहिना पैर दोनों हाथों के बीच ले जाएँ, बाएँ घुटने को ज़मीन पर रख सकते हैं। दृष्टि ऊपर की ओर रखेंI

ध्यान को ‘स्वाधिष्ठान’ अथवा ‘विशुद्घि चक्र’ पर ले जाएं। मुखाकृति सामान्य रखें।

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?
दाहिने पंजे को दोनो हाथों के बीच में रखें और दाहिनी पिंडली को ज़मीन के लंबवत रखेंI कूल्हों को नीचे की तरफ ले जाने का प्रयास करें ताकि खिंचाव को गहराता हुआ अनुभव किया जा सके।

10
हस्तपाद आसन

श्वास छोड़ते हुए बाएँ पैर को आगे लाएँ, हथेलियों को ज़मीन पर ही रहने दें। अगर ज़रूरत हो तो घुटने मोड़ सकते हैं।
माथा घुटनों का स्पर्श करता हुआ ध्यान नाभि के पीछे ‘मणिपूरक चक्र’ पर केन्द्रित करते हुए कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें। कमर एवं रीढ़ के दोष वाले साधक न करें।

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ? धीरे से घुटनों को सीधा करें और अगर संभव हो तो अपनी नाक से घुटनों को छूने का प्रयास करें, और श्वास लेते रहें।

11
हस्तउत्थान आसन

श्वास लेते हुए रीढ़ की हड्डी को धीरे धीरे ऊपर लाएँ, हाथों को ऊपर और पीछे की ओर ले जाएँ, कुल्हों को आगे की तरफ धकेलें।
ध्यान को गर्दन के पीछे ‘विशुद्धि चक्र’ पर केन्द्रित करें।

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?
सुनिश्चित करें कि कान बाजू से सटे हों और खिंचाव ऊपर की ओर हो, न कि पीछे की ओर।

12ताड़ासन

श्वास छोड़ते हुए पहले शरीर सीधा करें फिर हाथों को नीचे लाएँI इस अवस्था में विश्राम करें और शरीर में हो रही संवेदनाओं के प्रति सजगता ले आएँ।
इसके अभ्यासी के हाथों-पैरों के दर्द दूर होकर उनमें सबलता आ जाती है। गर्दन, फेफड़े तथा पसलियों की मांसपेशियां सशक्त हो जाती हैं, शरीर की फालतू चर्बी कम होकर शरीर हल्का-फुल्का हो जाता है।
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घर पर तैयार क्लींजर से करें चेहरे की सफाई, हल्दी, दूध और शहद से चेहरा बनेगा चमकदार How to make natural cleanser at home

चेहरा साफ़ करने के लिए उसे धोना ही काफी नहीं है बल्कि गहराई से सफ़ाई भी ज़रूरी है। इस तरह सफ़ाई न होने के कारण त्वचा पर मुंहासे, ब्लैक हैड्स होने के साथ ही त्वचा बेजान और रूखी भी नज़र आती है। त्वचा को दाग़-धब्बे रहित व चमकदार बनाए रखने के लिए घरेलू क्लींज़र अच्छा ज़रिया हैं। ये त्वचा को साफ़ करने के साथ ही निखरा और मुलायम बनाते हैं।
 कैसे घर पर बनाएं क्लींजर।
 मुंहासे और ब्लैक हैड्स दूर करता है क्लींजर

काबुली चना पाउडर और हल्दी

काबुली चना पाउडर और बेसन को ख़ासतौर से त्वचा की सफ़ाई के लिए इस्तेमाल में लिया जाता है। इनमें मौजूद प्राकृतिक गुण त्वचा की रंगत को निखारने के साथ ही टैनिंग, मुंहासों और दाग़-धब्बों को भी दूर करते हैं।

ऐसे करें इस्तेमाल : 

दो बड़े चम्मच काबुली चना पाउडर(या बेसन), 1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर और थोड़ा सा दूध डालकर अच्छी तरह से मिलाकर पेस्ट बना लें। पेस्ट अधिक गाढ़ा न रखें, वरना चेहरे पर लगाने पर चिपकेगा नहीं। पेस्ट को चेहरे पर लगाकर 10-20 सेकंड के लिए छोड़ दें। फिर हल्केहाथों से मसाज करें। इससे चेहरा साफ़ और निखरा नज़र आएगा

दूध है प्राकृतिक क्लींज़र

दूध बेहद असरदार प्राकृतिक क्लींज़र है। ये हर तरह की त्वचा के लिए फायदेमंद होता है। ये मृत त्वचा को निकालने में मदद करता है साथ ही चेहरे को प्राकृतिक चमक भी प्रदान करता है। दूध के इस्तेमाल से त्वचा कोमल और निखरी नज़र आती है।

ऐसे करें इस्तेमाल

5 बड़े चम्मच ठंडे दूध में चुटकीभर नमक मिलाएं। दोनों को अच्छी तरह से मिक्स करें। इस मिश्रण को कॉटन बॉल की मदद से चेहरे और गर्दन पर लगाएं। लगभग 1 से 2 मिनट बाद हल्के हाथों को चेहरे पर गोलाई में घुमाते हुए मसाज करें और पानी से धो लें। 

शहद से बनी रहेगी नमी 

शहद एक प्राकृतिक फेस क्लींज़र है। ये त्वचा से धूल-मिट्टी  को गहराई से निकालता है। संवेदनशील त्वचा के लिए ये काफी फायदेमंद है। ये त्वचा में नमी बनाए रखता है। 

ऐसे करें इस्तेमाल : 

बाउल में 1 छोटा चम्मच दूध और 4 छोटे चम्मच शहद डालकर मिलाएं । इसे चेहरे पर 10-20 सेकंड लगाकर छोड़ दें। इसके बाद हल्के हाथों की मदद से चेहरे पर मिश्रण को घुमाएं । यह मिश्रण सभी तरह की त्वचा के लिए फायदेमंद है।

मटके को जमीन में उल्टा रखकर पकाई जाती है किंग ऑफ गुजराती डिशेज ‘उंधियू’ King Of Gujarati dishes ‘Undhiyu’

 

    उंधियू गुजरात की एक खास डिश है, जो ज्यादातर सर्दियों के मौसम में ही बनाई और खाई जाती है। इसमें खासकर दक्षिणी गुजरात में सर्दी के मौसम में इफरात से मिलने वाली कई तरह की सब्जियां डाली जाती हैं। माना जाता है कि इस डिश का ईजाद सूरत में हुआ था। हालांकि इसको लेकर दूसरे शहर भी दावे कर सकते हैं। आज इसी डिश के बारे में बता रहे हैं शेफ हरपाल सिंह सोखी…
उल्टे मटके में पकाने से मिला नाम उंधियू

          इस डिश को यह नाम मिला है गुजराती शब्द ‘उंधू’ से जिसका मतलब होता है उलटा। दरअसल, पारंपरिक तौर पर उंधियू को मिट्‌टी के मटके में बनाया जाता है। इसमें इस्तेमाल होने वाली सभी सब्जियों को केले के पत्तों में लपेटकर उन्हें मटके में भर दिया जाता है। फिर मटके के मुंह पर आम के पत्ते रखकर उसे आटे से सील कर दिया जाता है। जमीन में गड्ढा खोदकर उसमें आग जलाते हैं और फिर इस मटके को गड्ढे में उलटा रख देते हैं। मटके के भीतर सब्जियों को करीब दो घंटे तक धीमी आंच पर पकाया जाता है। दो घंटे बाद जब उसे निकाला जाता है, तो बन जाता है उंधियू। लेकिन उंधियू को बनाने का यह तरीका अतीत की बात हो चुकी है। शहरों या कस्बों में अब बहुत ही कम लोग इस तरीके से उंधियू बनाते हैं। आजकल उंधियू को गैस पर ही कुकर या कड़ाही आदि में बनाया जाता है।
उल्टे मटके में पकाने से मिला नाम उंधियू

      तली मुठिया और बनाने का तरीका देता है खास स्वाद

इस डिश में मुख्य रूप से हरी बीन्स या ताजी मटर के दाने, कच्चे केले, छोटे बैंगन, छोटे आलू और यम (कंद) जैसी सब्जियां डलती हैं जो दक्षिण गुजरात के इलाकों जैसे सूरत, नवसारी और वलसाड में ठंड के मौसम में प्रचुरता से मिलती हैं। अब आप सोचेंगे कि यह तो मिक्स वेजिटेबल है। इसमें नया क्या है? जी हां, नया है तो इसमें डलने वाले मुठिया और इसे बनाने का तरीका। भले ही इसे अब मटके में नहीं बनाया जाता हो, तब भी इसे पकाने का तरीका आम सब्जी से अलग ही है। ये मुठिया ही उंधियू को खास बनाते हैं। उंधियू बनाने से पहले मुठिया बनाए जाते हैं। मुठिया बनाने के लिए बेसन के आटे में मेथी की भाजी को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर मिलाया जाता है और फिर उसे पूरी के आटे की तरह गूंध लिया जाता है। उन्हीं के छोटे-छोटे रोल्स कर उन्हें बाद में तेल में तलकर मुठिया बनाए जाते हैं।
खास मसालों से खिलता है रंग

        पिसे हुए भुने तिल, पिसे हुए भुने मूंगफली के दाने, कद्दूकस किया हुआ अदरक, पिसी हुई हरी मिर्च, पिसा हुआ हरा धनिया, नमक, मिर्च, धनिया पाउडर, अमचूर पाउडर, गुड़ या शक्कर आदि को थोड़े से तेल और पानी या छाछ में अच्छी तरह से भूनकर मसाला बनाया जाता है। इसी मसाले के इस्तेमाल से बनता है उंधियू। यहां हम इसकी पूरी विधि नहीं बता रहे हैं, लेकिन इतने से ही इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि उंधियू बनाने की प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है। उंधियू बनाने वाले को पर्याप्त समय और धैर्य का परिचय देना पड़ता है। जाहिर है, जब इतना समय लगेगा तो चीज भी तो स्वादिष्ट बनेगी ही। गुजराती परिवारों में उंधियू को गरमा-गरम चपाती या पूरी के साथ परोसा जाता है। यह शादियों में भी एक शानदार पकवान होता है।
सर्दियों के लिए रसम का नया अंदाज ‘मिलागू रसम’

      चलते-चलते दक्षिण भारत के गरमागरम रसम की भी बात कर लेते हैं। वैसे तो रसम दक्षिण भारत की सदाबहार डिश है। लेकिन सर्दियों के मौसम में इसमें भी थोड़ा ट्विस्ट दे दिया जाता है। इस मौसम में रसम में काली मिर्च की मात्रा काफी बढ़ा दी जाती है। काली मिर्च सर्दी के दिनों में शरीर को अंदर से गर्म रखती है। इस रसम को ‘मिलागू रसम’ कहा जाता है। 

स्किन से लेकर बालों तक की नमीं को बरकरार रखें How to maintain Skin and hair moisturisation in Winter

सर्दियों में ड्राय स्किन और डैंड्रफ की समस्या सबसे कॉमन है। बालों और स्किन का रूखापन रोकने के लिए मॉश्चराइज करना ही जरूरी नहीं बल्कि कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे बहुत ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल स्किन और बाल, दोनों को नुकसान पहुंचाता है। जानिए इस मौसम में कैसे रखें शरीर का ख्याल….
खास बातें जो स्किन और हेयर प्रॉब्लम्स से दूर रखेंगी


सर्दी में शुष्क हवा सबसे पहले त्वचा की नमी को खत्म करती है। इसका असर पूरी बॉडी पर पड़ता है। मार्केट में अलग-अलग बॉडी टाइप के अनुसार बॉडी लोशन उपलब्ध हैं, जिसे इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे स्किन ड्राई है तो ऐसा बॉडी लोशन प्रयोग करें जिसमें मिल्क और ग्लिसरीन की मात्रा हो।

2.

मार्केट में मौजूद बॉडी लोशन का प्रयोग नहीं करना चाहती हैं तो ग्लिसरीन, गुलाबजल और नींबू को मिलाकर आसानी से बॉडी लोशन तैयार कर सकती हैं। इसके लिए अगर 50 एमएल गुलाब जल ले रही हैं तो 20 एमएल ग्लिसरीन लें। इसमें 1 नींबू पूरा निचोड़कर अच्छे से मिलाएं। नहाने के तुरंत बाद इसे पूरे शरीर पर लगाएं

3.

इन दिनों गुनगुने पानी से ही नहाएं वरना रूखापन अधिक बढ़ सकता है। साधारण साबुन और स्क्रब का प्रयोग न करें। ये रूखी स्किन में खिंचाव पैदा करते हैं। इनकी जगह माइल्ड सोप का प्रयोग करें। इनमें केमिकल की मात्रा बेहद कम होती है और स्किन को मॉइश्चराइज करते हैं। 
4.
ग्लिसरीन बेस्ड मॉइश्चराइजर न होने पर नहाने के तुरंत बाद शरीर में नमी बरकरार रखने के लिए नारियल तेल को पूरे शरीर पर लगाएं। या फिर इसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदें नहाने के पानी में मिलाएं।
5.
अंडे का प्रयोग एक अच्छा फेस मास्क के रूप में हो सकता है। अंडे में प्रोटीन और वसा दोनों की मात्रा होती है, इसलिए चेहरे पर फेसमास्क की तरह प्रयोग करने से त्वचा में नमी और ग्लो दोनों ही रहता है। अंडे को शहद में मिलाकर भी फेसमास्क के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है। 
6.
होंठों की देखभाल के लिए पेट्रोलियम जेली या विटामिन-ई युक्त लिपबाम का प्रयोग करें। ये नमी बनाए रखता है। अगर होंठ बहुत ज़्यादा फट रहे हों तो कुछ दिनों के लिए लिपस्टिक ना लगाएं। सर्दियों में मैट लिपस्टिक लगाने के पहले और लिपस्टिक लगाने के बाद होंठों को मॉइस्चराइज करना न भूलें।
7.
पैरों की देखभाल के लिए ऑयल बेस्ड मॉइस्चराइजर लगाएं। ऑयल बेस्ड मॉस्चराइजर पैर की त्वचा पर एक मजबूत परत बनाता है, जो किसी भी साधारण क्रीम की तुलना में त्वचा की नमी को बनाए रखने में अधिक कारगर है। एड़ियों को मुलायम बनाने के लिए पेट्रोलियम जेली या ग्लिसरीन बेस्ड लोशन लगाएं। समय-समय पर एड़ियों को स्क्रब कर मॉइश्चराइज करें।
8.
ठंड में अक्सर आंखों के आसपास की त्वचा सिकुड़ी नजर आती है और गंदगी जम जाती है। इससे बचने के लिए सोने से पहले साफ पानी से आंखों को धो लें और फ‌िर कॉटन बॉल से पोछें। अब कॉटन बॉल को बादाम तेल में डुबोकर आइलिड्स पर पांच से दस मिनट तक रखें, उसके बाद एक उंगली से हल्के हाथों से मसाज करें।
9.
बाल सर्दी में भी मजबूत रहें, इसके लिए उनकी जड़ों से मजबूत होना जरूरी है। बालों की नियमित तौर पर मसाज करनी चाहिए। हफ्ते में दो से 3 बार मसाज करना पर्याप्त रहता है। जैतून के तेल से या बादाम के तेल से बालों की मसाज की जा सकती है। ठंड के मौसम में तेल में थोड़ा सा नींबू भी डाल लें और इससे बालों की हफ्ते में 1 बार 15 मिनट तक मसाज करें।
10.
डैंड्रफ से छुटकारा पाने के लिए एक कटोरी दही में दो नींबू निचोड़कर पेस्ट जैसा बना लें। इसे बालों के जड़ों पर हाथ के पोर से लगाएं और 15 मिनट तक मसाज करें। पेस्ट को 1 से डेढ़ घंटे तक बालों में लगा रहने दें और इसके बाद हल्के गुनगुने पानी से बालों को धो लें। इससे बालों का रुखापन और डैंड्रफ दूर होता है। 

सर्दियों में डाइट में बदलाव कर अस्थमा मरीज रख सकते हैं अपना ख्याल Diet Change for asthma pateint In Winter Season

सर्दी का मौसम जहां स्वस्थ लोगों के लिए सौगात बनकर आता है तो वहीं अस्थमा के रोगियों के लिए परेशानी का सबब भी रहता है। अस्थमा रोगियों के लिए खासकर चढ़ती और उतरती सर्दी ज्यादा घातक होती है, क्योंकि इस दौरान मौसम में तेजी से बदलाव होता है। इससे उनमें सांस चलने की समस्या काफी बढ़ जाती है। अब जबकि मकर संक्रांति के बाद सूरज अपनी दिशा बदलेगा तो बदलते मौसम में अस्थमा रोगियों को कुछ ज्यादा सतर्कता रखनी होगी। घर के बाहर निकलने पर इन्हें अपने मुंह और नाक को मास्क या कपड़े से कवर करके रखना होगा। इसके अलावा डाइट में कुछ चीजों को शामिल करने से भी अस्थमा के मरीजों को थोड़ी सहूलियत हो सकती है। एसे मे हम अापको बताने जा रहे हे तीन असरदार तरीके…

तीन तरीके आजमा कर पाएं राहत

हल्दी और शहद    

 

हल्दी और शहद दोनों में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी एलर्जिक प्रॉपर्टीज होती हैं जो कफ से राहत दिलाती है। अगर हल्दी व शहद को मिलाकर लिया जाए तो इसका असर दोगुना हो जाता है। अस्थमा के रोगियों के लिए तो यह प्रभावी फॉर्मूला है। रोजाना दो बार चुटकी भर हल्दी में शहद मिलाकर उसे चाटने से अस्थमा रोगियों को श्वास चलने की समस्या में राहत मिलती है। सर्दी-जुकाम से परेशान सामान्य व्यक्ति भी इसका इस्तेमाल कर सकता है।

अंजीर का सेवन

रोजाना रात को सोने से पहले साफ पानी में दो-तीन सूखे अंजीर भिगो दीजिए। अंजीर भिगोने से पहले उन्हें भी अच्छे से धो लीजिए। सुबह उठकर खाली पेट ही उन्हें अच्छी तरह से चबा-चबाकर खा लीजिए। अंजीर खाने के बाद उस पानी को पी लीजिए जिसमें आपने रात भर अंजीर भिगोए थे। अंजीर श्वास नली में जमा कफ को साफ कर देता है जिससे अस्थमा के मरीज को श्वास लेने में कम दिक्कत होती है।

अदरक-लहसुन की चाय

अस्थमा के दौरान श्वास लेने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने में अदरक और लहसुन की चाय भी काफी मददगार होती है। इसे बनाना भी बहुत आसान है। पहले अदरक की सामान्य चाय बना लीजिए। अब लहसुन की दो-दिन कलियों को पीसकर उसे उस चाय में मिक्स कर लीजिए। अब इसे दोबारा से गरम करने की जरूरत नहीं है। यह चाय पीने में बेस्वाद लग सकती है, लेकिन काफी असरदार होती है।

5 Ways to Be Healthy, Fit and Happy स्वस्थ, फिट और खुश रहने के 5 तरीके

यहां आपको स्वस्थ, फिट और खुश रहने के ५ आसान तरीके बताए गए हैं। और अभी उन्हें अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने के लिए पूरी जीवन शैली  अपनाए।

आइए इसका सामना करते हैं, हम सभी जानते हैं कि हम स्वस्थ रहने के लिए अपनी साप्ताहिक दिनचर्या में सुधार कर सकते हैं, अधिक फिट हो सकते हैं और कम तनाव महसूस कर सकते हैं। दुर्भाग्य से, अक्सर हमारे व्यस्त कार्यक्रम, ओवरबुक किए गए कैलेंडर और कई प्रतिबद्धताएं खुद का स्वस्थ्य एवं फिट होने के रास्ते में बाधा हैं।

1
20% कम खाएं: हम सभी आवश्यकता से अधिक खाते हैं!

आज से ही शुरू करो।
 भोजन  एक पौष्टिक दृष्टि से सभी की जरूरत है।

एक छोटी प्लेट या कटोरी का उपयोग करें। यदि आप कल कम खाना चाहते हैं, तो अपने आप से कुछ छोटे बर्तन खरीदें।

अपने प्रोटीन को साइड डिश बनाएं। अपने सलाद और सब्जियों के साथ अपनी प्लेट भरें और अपने आप को जरुरी आवश्यकता की तुलना में थोड़ा काम खाएँ।

2
। दैनिक व्यायाम करें: हर दिन कुछ ऐसा करें जिसमें हमारा शारीर हो।

प्रति दिन २० मिनट के लिए व्यायाम करें। कोई बात  नहीं आप क्या करे । टहलें, खिंचाव करें, अपनी बाइक चलाएं, योगा करें, रस्सी कूदें, तैराकी करें। विकल्प अंतहीन हैं, और जैसा कि जानीमानी कंपनी नाइक कहती है: Just Do It।
  आपको कोई ऐसा व्यायाम करो जो आपके पुरे शरीर को पसीना बहा दे।

दो शब्द: आकस्मिक व्यायाम! एस्केलेटर के बजाय सीढ़ियां लें, बगीचे को रेक करें, काम करने के लिए कार को धोएं, पैदल चलें या बाइक चलाएं या  हर दिन  ऑफिस से अपनी कार ३ ब्लॉक दूर पार्क करें।

3
। ध्यान करें:
 अपने दिन रूटीन  सेट करने का एक शानदार तरीका।

अपने दिन की शुरुआत में सिर्फ कुछ  पल बैठने और ध्यान लगाने की कोशिश करें। आप एक समय निर्धारित कर सकते हैं और पूरे दिन को उज्जवल बना सकते हैं। अलग-अलग ध्यान विकल्प बहुत सारे हैं – अपनी आवश्यकताओं के अनुसार चुनें।
इसके बारे में हम आगे एक नयी पोस्ट बनाएंगे जो ध्यान यानि मेडिकेशन क्या है और इसके फायदे के बारे में डिटेल में जानेंगे
लेकिन अभी में सिर्फ आपको एक शरुआत बताने जा रहा हु ।

५ मिनट के लिए एक टाइमर सेट करें, एक आरामदायक जगह ढूंढें, अपनी आँखें बंद करें, एक गहरी साँस लें और इसे छोड़ दे ।

कुछ अलग प्रकारों को आज़माएँ और देखें कि आपके लिए क्या आसान है। जप करो, गाओ, सुनो, कविता पढ़ो या बस बैठो।

4
। अधिक आराम करें: आराम और नींद के लिए अपनी आवश्यकता पर ध्यान देना शुरू करें। बाकी यह नहीं है कि आप हर रात कितने घंटे की नींद लेते हैं। अपने सप्ताह में कुछ आराम और विश्राम को भी शामिल करना सुनिश्चित करें।

· प्रति सप्ताह कम से कम एक बार गर्म स्नान करें। कोई भी एरोमाथेरेपी जोड़ें जो आपके लिए अछि हो और  गर्म स्नान का पानी आपकी मांसपेशियों को शांत करेगा और आपके दिमाग को आराम देगा।
ओरोमाथेरपी के बारे में हम आगे एक पोस्ट बनायेंगे। जिसमे उनके बारे में डिटेल्स में जांएंगे।

पर्याप्त नींद लेने के महत्व को कम न करें। रोज़ाना  समयसे पहले बिस्तर पर सो जाये  और देखें कि आप सुबह कैसे महसूस करते हैं; आपको बस अपने नियमित समय में एक या दो घंटे की नींद जोड़ने की आवश्यकता हो सकती है।

5
। जॉय फैक्टर बढ़ाएँ:
ख़ुशी सभी को अलग-अलग मायनो में आती है; अपने दैनिक जीवन में आनंद बढ़ाने के तरीके खोजना आपके विचार से आसान है।

संगीत सुनें। यह आपकी आवश्यकताओं के आधार पर आराम या उत्थान हो सकता है। काम से घर के रास्ते में कार में कुछ शास्त्रीय संगीत में अपना दिन गायन या ट्यूनिंग शुरू करने के लिए शॉवर में रहने के दौरान कुछ पसंदीदा धुनों को बजाने का प्रयास करें।

अपने जीवन में एक सामयिक मालिश जोड़ें – यह एक वास्तविक उपचार है जिसे आप जानते हैं कि आप योग्य हैं। यह आपके शरीर का सम्मान करने और मन को शांत करने का एक अच्छा तरीका है।
हम आगे की पोस्ट में मालिस के बारे में डिटेल्स में जांएंगे।

अच्छे दोस्तों और परिवार के साथ कुछ नियमित रूप से निर्धारित समय की पिकनिक बनाएं। अपने सबसे अच्छे दोस्तों के साथ परिवार के रविवार की चुटी में होटल में डिनर में जाये । जिन लोगों से आप प्यार करते हैं और जो आपसे प्यार करते हैं, उनके साथ रहने से आपकी खुशी के पूरे एहसास में फर्क पड़ता है।
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