उंधियू गुजरात की एक खास डिश है, जो ज्यादातर सर्दियों के मौसम में ही बनाई और खाई जाती है। इसमें खासकर दक्षिणी गुजरात में सर्दी के मौसम में इफरात से मिलने वाली कई तरह की सब्जियां डाली जाती हैं। माना जाता है कि इस डिश का ईजाद सूरत में हुआ था। हालांकि इसको लेकर दूसरे शहर भी दावे कर सकते हैं। आज इसी डिश के बारे में बता रहे हैं शेफ हरपाल सिंह सोखी…
उल्टे मटके में पकाने से मिला नाम उंधियू
इस डिश को यह नाम मिला है गुजराती शब्द ‘उंधू’ से जिसका मतलब होता है उलटा। दरअसल, पारंपरिक तौर पर उंधियू को मिट्टी के मटके में बनाया जाता है। इसमें इस्तेमाल होने वाली सभी सब्जियों को केले के पत्तों में लपेटकर उन्हें मटके में भर दिया जाता है। फिर मटके के मुंह पर आम के पत्ते रखकर उसे आटे से सील कर दिया जाता है। जमीन में गड्ढा खोदकर उसमें आग जलाते हैं और फिर इस मटके को गड्ढे में उलटा रख देते हैं। मटके के भीतर सब्जियों को करीब दो घंटे तक धीमी आंच पर पकाया जाता है। दो घंटे बाद जब उसे निकाला जाता है, तो बन जाता है उंधियू। लेकिन उंधियू को बनाने का यह तरीका अतीत की बात हो चुकी है। शहरों या कस्बों में अब बहुत ही कम लोग इस तरीके से उंधियू बनाते हैं। आजकल उंधियू को गैस पर ही कुकर या कड़ाही आदि में बनाया जाता है।
उल्टे मटके में पकाने से मिला नाम उंधियू
तली मुठिया और बनाने का तरीका देता है खास स्वाद
इस डिश में मुख्य रूप से हरी बीन्स या ताजी मटर के दाने, कच्चे केले, छोटे बैंगन, छोटे आलू और यम (कंद) जैसी सब्जियां डलती हैं जो दक्षिण गुजरात के इलाकों जैसे सूरत, नवसारी और वलसाड में ठंड के मौसम में प्रचुरता से मिलती हैं। अब आप सोचेंगे कि यह तो मिक्स वेजिटेबल है। इसमें नया क्या है? जी हां, नया है तो इसमें डलने वाले मुठिया और इसे बनाने का तरीका। भले ही इसे अब मटके में नहीं बनाया जाता हो, तब भी इसे पकाने का तरीका आम सब्जी से अलग ही है। ये मुठिया ही उंधियू को खास बनाते हैं। उंधियू बनाने से पहले मुठिया बनाए जाते हैं। मुठिया बनाने के लिए बेसन के आटे में मेथी की भाजी को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर मिलाया जाता है और फिर उसे पूरी के आटे की तरह गूंध लिया जाता है। उन्हीं के छोटे-छोटे रोल्स कर उन्हें बाद में तेल में तलकर मुठिया बनाए जाते हैं।
खास मसालों से खिलता है रंग
पिसे हुए भुने तिल, पिसे हुए भुने मूंगफली के दाने, कद्दूकस किया हुआ अदरक, पिसी हुई हरी मिर्च, पिसा हुआ हरा धनिया, नमक, मिर्च, धनिया पाउडर, अमचूर पाउडर, गुड़ या शक्कर आदि को थोड़े से तेल और पानी या छाछ में अच्छी तरह से भूनकर मसाला बनाया जाता है। इसी मसाले के इस्तेमाल से बनता है उंधियू। यहां हम इसकी पूरी विधि नहीं बता रहे हैं, लेकिन इतने से ही इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि उंधियू बनाने की प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है। उंधियू बनाने वाले को पर्याप्त समय और धैर्य का परिचय देना पड़ता है। जाहिर है, जब इतना समय लगेगा तो चीज भी तो स्वादिष्ट बनेगी ही। गुजराती परिवारों में उंधियू को गरमा-गरम चपाती या पूरी के साथ परोसा जाता है। यह शादियों में भी एक शानदार पकवान होता है।
सर्दियों के लिए रसम का नया अंदाज ‘मिलागू रसम’
चलते-चलते दक्षिण भारत के गरमागरम रसम की भी बात कर लेते हैं। वैसे तो रसम दक्षिण भारत की सदाबहार डिश है। लेकिन सर्दियों के मौसम में इसमें भी थोड़ा ट्विस्ट दे दिया जाता है। इस मौसम में रसम में काली मिर्च की मात्रा काफी बढ़ा दी जाती है। काली मिर्च सर्दी के दिनों में शरीर को अंदर से गर्म रखती है। इस रसम को ‘मिलागू रसम’ कहा जाता है।
